मांगलिक कन्या के विवाह में आ रही वर्षों की देरी दूर करने हेतु शास्त्रीय कुंभ व अर्क विवाह विधान — उज्जैन में शुभ मुहूर्त में संपन्न।
मांगलिक कन्या के विवाह में देरी होने पर शास्त्रानुसार कुंभ (घड़ा) या अर्क (आक वृक्ष) से प्रतीकात्मक विवाह करवाया जाता है। इससे मांगलिक दोष का दुष्प्रभाव कम होकर शीघ्र सुयोग्य वर मिलने का योग बनता है।
विधान में मंगलसूत्र-पाणिग्रहण के समस्त मंत्रों के साथ प्रतीकात्मक फेरे होते हैं, बाद में हवन व दान होता है। कुंभ व अर्क विवाह में शामिल होना शुभ कार्यों की बाधा को समाप्त करता है।
अवधि
2-3 घंटे
स्थल
गृह / मंदिर
यजमान
1 व्यक्ति (कन्या)
मांगलिक दोष व विवाह-देरी का निर्धारण।
आक वृक्ष या घड़े का स्थापन व संकल्प।
विवाह मंत्रों से कुंभ/अर्क के साथ विवाह संस्कार।
दान, मंगलसूत्र सहित संपूर्ण विधि।
समस्त सामग्री व्यवस्था उज्जैन में हम करते हैं — यजमान को केवल समय देना है।
कुंभ/अर्क विवाह के लिए फाल्गुन-वैशाख माह, संक्रांति अथवा विवाह हेतु निर्धारित शुभ मुहूर्त में किया जाता है — कुमारिका की कुंडली देखकर सटीक दिन बताएँगे।