राहु-केतु की छाया से मुक्ति का सर्वश्रेष्ठ अनुष्ठान — शिप्रा तट / सिद्धवट, उज्जैन पर विधिपूर्वक संपन्न।
जब कुंडली में राहु और केतु आपस में (कर्क-मकर रेखा पर) स्थित हों तो कालसर्प दोष बनता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन में अनिश्चितता, मानसिक तनाव, अस्थिर सफलता, धन-हानि व विवाह में बाधा के रूप में दिखता है।
इस अनुष्ठान में शास्त्रसम्मत 9 बार कालसर्प पूजा, जल दान, नाग देव की अर्चना व 11 मंत्रों से हवन किया जाता है। पूजा के पश्चात यजमान को गुरु-मंत्र, पूजा वस्त्र व प्रसाद भेजा जाता है।
अवधि
3-4 घंटे
स्थल
शिप्रा तट
यजमान
1 व्यक्ति
मंगल भगवती का आह्वान कर शिप्रा तट पर स्नान, उपवास व संकल्प लिया जाता है।
नाग देव को दूध-जल व पुष्पांजलि, सर्प-मंत्र पाठ और श्रद्धा से दान।
राहु-केतु समेत समस्त ग्रहों के 11 मंत्रों से जागृत अग्नि में आहुतियां।
पूर्णाहुति, दान-दक्षिणा, गुरु-मंत्र, कुंडली पर जलार्पण व आशीर्वाद से विधि सम्पन्न।
समस्त सामग्री व्यवस्था उज्जैन में हम करते हैं — यजमान को केवल समय देना है।
कालसर्प दोष शांति के लिए सोमवती अमावस्या, नाग पंचमी व राहु काल-रहित शुभ मुहूर्त सर्वोत्तम माने गए हैं। अपनी कुंडली भेजें — शीघ्र ही सटीक मुहूर्त व विधि बताएँगे।