बृहस्पति-राहु के चांडाल योग से बुद्धि-भ्रम व निर्णय-अस्थिरता दूर करने हेतु शांति अनुष्ठान — उज्जैन में।
जब कुंडली में बृहस्पति (गुरु) और राहु की युति हो तो गुरु चांडाल दोष बनता है। इससे बुद्धि में भ्रम, पढ़ाई में बाधा, कमजोर निर्णय व आर्थिक अस्थिरता आती है।
शांति अनुष्ठान में गुरु-राहु के मंत्रों का जाप, विशेष वस्त्रों से पूजन व हवन किया जाता है — ज्ञान, उच्च शिक्षा व स्थिरता के योग सुधरते हैं।
अवधि
2-3 घंटे
स्थल
सिद्धवट
यजमान
1 व्यक्ति
गुरु देव का आह्वान व राहु की शांति।
गुरु (बृहस्पति) के बीज-मंत्र का जाप।
गुरु-राहु योग शांति हेतु हवन।
दान-दक्षिणा व गुरु-मंत्र सहित सम्पन्न।
समस्त सामग्री व्यवस्था उज्जैन में हम करते हैं — यजमान को केवल समय देना है।
गुरुवार, पुष्य नक्षत्र व बृहस्पति उदय के मुहूर्त में यह अनुष्ठान अत्यंत फलदायी होता है।